संथालों में कुल 12 गोत्र ( परिस ) है ।शुरु में सात ही मूल गोत्र थे ( हांसदा ,मुर्मू ,हेम्ब्रोम ,किस्कू, मरांडी ,सोरेन ,टुडू )। बाद में और पाँच गोत्र बनाये गये ।(बसकी ,बेसरा ,चोड़े ,पवरिया ,बेदिया )। क्रम गोत्र (परिस ) गोड़ोम 1. हांसदा हांस -हसिल 2. मुर्मू ठाकुर जी 3. हेम्ब्रोम काछिम कुवार 4. किस्कू लिटा गोसाई 5. मरांडी झिमोली 6. सोरेन मोड़े को तुरुय कों 7. टुडू 8. बास्के ओले इचाक 9. बेसरा राघु बोवाड़ 10. चोड़े डाटो कुवार 11. पावरिया तायान 12. बेदिया म़ागाड़ संथाल में उप- गोत्र (कुल समूह ) को खूट कहते है ।संथाल जनजाति में 12 खूट माने गये है ।12 गोत्र के 12खूट , कुल 144 खूट होते है । संथालो में खूट बाटते समय देखा गया कि कौन क्या काम कर रहा है ।जैसे -जो लोग सादा जीवन जी रहे थे ,उन्हें "सादा " खूट दिया गया । हिरण का मॉस को अधिक काटने वाले को "लाहेर " खूट मिला ।जो बैठे हुए थे उन्हें "ओबोर ", जो तेल लगा रहे थे उन्हें "नायके खिल "आदि खूट दिये गये । गोत्र (परिस )के आगे में खूट को जोड़कर उपगोत्र का विभाजन किया गया ।जैसे -सादा हांसदा ,सादा सोरेन,... आदि। लात हांसदा ,लात मुर्मू ,लात हेम्ब्रोम ,.....आदि ।लाहेर हांसदा ,लाहेर मुर्मू ,लाहेर किस्कू ,लाहेर टुडू ,....आदि ।
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